परिचय

गुलाब सिंह हिन्दू डिग्री कालिज की स्थापना स्वनामधन्य पूजनीय स्व0 रानी कृष्ण कुमारी ने अपनी सम्पूर्ण चल-अचल सम्पत्ति देकर अपने पति स्व0 राजा गुलाब सिंह जी रईस के युवावस्था में ही आकस्मिक निधन के बाद उनकी पुण्य स्मृति को चिरस्थायी बनाने हेतु सन् 1962 ई0 में अपने स्याऊ स्थित भवन में की थी। कुछ समय बाद विकास और विस्तार को ध्यान में रखकर इसे 6 दिसम्बर, 1963 को वर्तमान स्थल पर स्थानान्तरित किया गया। रानी साहिबा अपनी आखिरी साँस तक कालिज विकास में एक तपस्विनी की तरह सपर्पित रहीं। कालिज के अतिथि भवन में ही 20 सितम्बर, 1979 को रानी जी ने अपना शरीर त्यागा।
रानी कृष्णा कुमारी द्वारा रोपा गया शिक्षा का वह नन्हा पौधा विकसित होकर वट वृक्ष बनने की दिशा में अग्रसर है तथा सम्पूर्ण-चान्दपुर क्षेत्र में उच्च शिक्षा का यह प्रमुख आकर्षण केन्द्र है। लगभग 3,000 संस्थागत व लगभग 1500 व्यक्तिगत विद्यार्थियों के लिए महाविद्यालय में अनेक अध्ययन कक्ष, दो विशाल कक्ष, भूगोल प्रयोगशाला, एक कम्प्यूटर लैब, सुसज्जित पुस्तकालय, छात्रा कामन रूम तथा एक सुन्दर विशाल प्लेग्राउन्ड कालिज के विशेष आकर्षण हैं।

संस्थापक

महाविद्यालय एक दृष्टि में

आंकड़े

लगभग 3,000 संस्थागत व लगभग 1500 व्यक्तिगत विद्यार्थियों के लिए महाविद्यालय में अनेक अध्ययन कक्ष, दो विशाल कक्ष, भूगोल प्रयोगशाला, एक कम्प्यूटर लैब, सुसज्जित पुस्तकालय, छात्रा कामन रूम तथा एक सुन्दर विशाल प्लेग्राउन्ड कालिज के विशेष आकर्षण हैं।

4500

संस्थागत व व्यक्तिगत विद्यार्थी

55

साल का गर्वित इतिहास

120

अनुभवी अध्यापक

  • प्राचार्य सन्देश

    शिक्षण सत्र २०१८-१९ में आप सभी का हार्दिक स्वागत है| शिक्षार्थियों के बहुमुखी व्यक्तित्व निर्माण हेतु शिक्षण संस्थाऐं कार्यशाला होती है जहाँ शिक्षार्थी अपने सुन्दर भविष्य के निर्माण एवं भावी विषमतम परिस्थितियों से जूझने के लिए स्वयं को तैयार करते है | हमारा महाविद्यालय इसके लिए तत्पर और संकल्पबद्ध है | आप महाविद्यालय में प्रवेश पाकर इस स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाएंगे , ऐसी आप से अपेक्षा है | शिक्षा एक सशक्त उपाय की तरह है जो व्यक्ति की जीविका का साधन बनने के साथ-साथ उसके सर्वांगीण विकास का पथ प्रशस्त करती है | सदैव याद रहे की समय अमूल्य है, आप अनुशासित होकर समय का सर्वोत्तम सदुपयोग कर कठोर परिश्रम से अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते है, इसलिए जीवन में उद्यमशील एवं पुरुषार्थी बनकर अपने लक्ष्य की प्राप्ति की ओर सदैव तत्पर रहें , सफलता निश्चित है |

    डॉo साधना सिंह ( प्राचार्या )

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