महाविद्यालय नियम/निर्देश

स्थाई प्रवेश की आवश्यक शर्ते

1. प्रत्येक अभ्यर्थी का महाविद्यालय में प्रवेश तब तक अस्थाई माना जायेगा जब तक वह नियमानुसार महाविद्यालय के सभी शुल्क कालेज-कार्यालय में जमा नही कर देता या जब तक वह नियमित रूप से अपनी कक्षाओं में आना प्रारम्भ नही कर देता या जब तक अपेक्षित सभी प्रमाण-पत्र कार्यालय में जमा नही कर देता। उक्त शर्ते, पूर्ण कर लेने पर ही प्रवेश स्थाई समझा जायेगा। शर्ते पूर्ण न होने पर प्रवेश स्वयं निरस्त समझा जायेगा। प्रवेश के बाद भी यदि किसी छात्र/छात्रा के व्यवहार तथा चरित्र के विषय में कोई असन्तोषजनक तथ्य मिलते हैं तो ऐसे छात्र/छात्राओं का प्रवेश रद्द कर दिया जायेगा।

2. वे छात्र जो महाविद्यालय के नियमित छात्र नही है, उन्हें भूगोल की प्रयोगात्मक कक्षाओं में अध्ययन की अनुमति शिक्षण शुल्क तथा प्रयोगशाला शुल्क लेकर दी जा सकती है। सामान्यतः ऐसी अनुमति संस्था के भूतपूर्व छात्रों को ही दी जा सकती है।

3. कालेज कार्यालय द्वारा उन्हीं आवेदन-पत्रों को प्रवेश-समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा जो इस विवरण पत्रिका में उल्लिखित प्रमाण-पत्रों से युक्त होंगे। अन्य सभी अधूरे आवेदन-पत्र रद्द समझे जायेंगें।

4. साक्षात्कार और प्रवेश तिथियाँ यथासमय सूचना पट्ट पर चस्पा कर दी जायेगी।

5. प्रवेश हेतु फार्म जमा करने की अन्तिम तिथि निकल जाने पर प्रवेश प्रार्थना-पत्र को स्वीकार नहीं किया जायेगा।

सामान्य अनुशासन के नियम और निर्देश:

1. प्रत्येक छात्र को अपना परिचय-पत्र सदैव अपने साथ रखना चाहिए। परिचय-पत्र खो जाने पर 10/- रू0 जमा करके नया परिचय पत्र बनवा लेना चाहिए। किसी अन्य छात्र के परिचय-पत्र का प्रयोग अक्षम्य अपराध माना जायेगा।

2. महाविद्यालय की सम्पत्ति को क्षति पहुँचाना और अधिकारियों, प्राध्यपकों अथवा कर्मचारियों के साथ अभद्र आचरण करना दण्डनीय है। इसके लिए दोषी पाये जाने पर दोषी छात्र को दण्डित किया जायेगा तथा उसे निष्कासित भी किया जा सकता है।

3. कार्यालय, पुस्तकालय और बरामदें में अनावश्यक भीड़ न लगावें।

4. महाविद्यालय भवन तथा उसकी दीवारों पर कृपया कुछ न लिखें और न उसे गन्दा करें।

5. अपने सहपाठियों में मित्रवत् व्यवहार करें, लड़ाई झगड़ा न करें।

6. छात्राओं को बहन मानकर उनके प्रतिष्ठा के विरूद्ध न कुछ कहें न करें।

7. महाविद्यालय की सम्पत्ति न चुरायें, न नष्ट करें न नष्ट होने दें।

8. अपनी छोटी-बड़ी समस्यायें परस्पर मिल-जुलकर सुलझायें, बाहरी तत्वों का समावेश अवांछनीय है अक्षम्य भी।

9. अपने गुरूजनों का सम्मान करें तथा उनका कहना मानें।

10. अपनें वचन और आचरण से महाविद्यालय परिसर के अन्दर या बाहर किसी के साथ अभिष्ठता और अभद्रता का व्यावहार न करें ताकि समाज में अपनी और आपके इस महाविद्यालय की छवि समुज्जवल बनी रहें।